आरा | आर्य समाज मंदिर, आरा में अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती जी का 99वां बलिदान दिवस श्रद्धा और वैदिक परंपरा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वामी श्रद्धानंद जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका उद्देश्य समाज को जोड़ना था, न कि धर्म और जाति के नाम पर बांटना।
वक्ताओं ने कहा कि वेद सार्वोपरी ग्रंथ हैं और इन्हीं वैदिक मूल्यों के आधार पर भारत ने विश्व गुरु का स्थान प्राप्त किया। आर्य समाज आरा के तत्वावधान में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बलिदान दिवस मनाया गया। वक्ताओं ने आह्वान किया कि आडंबर से दूर रहकर स्वामी श्रद्धानंद जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा महिलाओं को सम्मान देते हुए आर्य समाज से जोड़ने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में कहा गया कि मैकाले की शिक्षा पद्धति से संस्कारविहीन हो रहे भारत के विरोध में स्वामी श्रद्धानंद जी ने गुरुकुल परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए गुरुकुलों की स्थापना की। आर्य समाज मंदिर स्थित श्रद्धानंद भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में वैदिक मूल्यों की ओर लौटने को समाज के सर्वांगीण उत्थान का मार्ग बताया गया।
वक्ताओं ने कहा कि भौतिकतावाद, भोगवाद, अंधविश्वास और पाखंड-आडंबरों की अंधी दौड़ में फंसी मानव जाति के उद्धार के लिए आर्य समाज से जुड़ना आज के समय की आवश्यकता है। वैदिक संस्कृति, जो भारतीय संस्कृति की आत्मा है, उसकी रक्षा कर ही राष्ट्र के गौरव को बढ़ाया जा सकता है और भारत को पुनः विश्व गुरु की संज्ञा प्राप्त हो सकती है।
कार्यक्रम के दौरान “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” के जयघोष के साथ विश्व शांति की कामना की गई। वक्ताओं ने बताया कि स्वामी श्रद्धानंद जी की 23 दिसंबर 1926 को अब्दुल रशीद नामक उन्मादी द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
स्वामी श्रद्धानंद जी एक महान स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, शिक्षाविद् और समाजसेवी सन्यासी थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन स्वाधीनता, स्वराज, शिक्षा और वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय सहित अनेक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की तथा 1920 के दशक में शुद्धि आंदोलन के माध्यम से हिंदू समाज को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अछूतों के उत्थान के लिए भी उनके योगदान को वक्ताओं ने स्मरण किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा जिलाध्यक्ष श्री दुर्गा राज उपस्थित रहे। विशिष्ट वक्ताओं में श्री रामानंद प्रसाद आर्य (कार्यकारी प्रधान, बिहार राज्य प्रतिनिधि सभा), श्री सिद्धेश्वर वर्मा, श्री सुखलाल प्रसाद, विद्यासागर जी (महावीर विद्यालय), श्री वेदानंद जी, श्री विद्याभूषण जी, प्रो. हरि नारायण आर्य, डॉ. सुरेंद्र प्रसाद, श्री आर.बी. सिंह, आचार्य ओमप्रकाश शास्त्री (प्रधान, आर्य समाज) सहित अनेक विद्वान, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्राकृतिक योग पीठ ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी विक्रमादित्य ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त किया।