पर्यावरण बचाओ–देश बचाओ दिवस पर आरा में जनआंदोलन, अरावली से ग्रेट निकोबार तक पर्यावरण विनाश के खिलाफ़ जोरदार आवाज़

आरा (भोजपुर), 28 दिसंबर 2025। पर्यावरण बचाओ–भारत बचाओ दिवस के अवसर पर भाकपा (माले), आइसा और RYA के संयुक्त आह्वान पर आरा में शनिवार को पर्यावरण बचाओ मार्च का आयोजन किया गया। मार्च भाकपा माले जिला कार्यालय श्री टोला से प्रारंभ होकर पूर्वी गुमटी, नवादा होते हुए रेलवे परिसर पहुंचा, जहां यह एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गया।

सभा का संचालन छात्र संगठन आइसा के भोजपुर जिला सहसचिव रौशन कुशवाहा ने किया।

“प्रकृति बचाने का कोई प्लान-बी नहीं” — सुदामा प्रसाद

सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले केंद्रीय कमेटी सदस्य सह आरा लोकसभा सांसद कॉमरेड सुदामा प्रसाद ने कहा कि
“प्रकृति और हमारी जल-जंगल-ज़मीन को बचाने के लिए कोई प्लान-बी नहीं है। हमारे पास केवल एक ही दुनिया है।”
उन्होंने दिल्ली की जहरीली हवा से लेकर छत्तीसगढ़, ग्रेट निकोबार और हिमालय में हो रहे विनाश का हवाला देते हुए कहा कि मोदी सरकार की नीतियाँ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के खिलाफ़ हैं। सरकार एक ओर झूठे दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसके कारपोरेट मित्र पर्यावरण को बेरहमी से नष्ट कर रहे हैं।

अरावली को खनन माफिया के हवाले करने का आरोप

भाकपा माले केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉ. राजू यादव ने कहा कि मोदी सरकार ने दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली की परिभाषा बदलकर उसे खनन के लिए खोल दिया है।
उन्होंने बताया कि लगभग 670 किलोमीटर में फैली अरावली दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के लिए ‘फेफड़े’ का काम करती है। इसके नष्ट होने से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भीषण मरुस्थलीकरण का खतरा पैदा हो जाएगा।

हिमालय में विनाशकारी परियोजनाओं पर सवाल

इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य सचिव व अगियांव के पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन ने कहा कि उत्तराखंड की चारधाम सड़क परियोजना को जानबूझकर छोटे हिस्सों में बांटकर समग्र पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) से बचा गया।
उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप भूस्खलन, बाढ़ और जोशीमठ जैसी त्रासदियाँ सामने आ रही हैं, जहां स्थानीय लोगों की जान और आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है।

ग्रेट निकोबार और हसदेव अरण्य पर कारपोरेट हमला

इंसाफ मंच के राज्य सचिव व आरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी कॉ. कयामुद्दीन अंसारी ने आरोप लगाया कि ग्रेट निकोबार में 130 वर्ग किलोमीटर प्राकृतिक जंगल को मेगा परियोजना के नाम पर नष्ट कर दिया गया। इसके बदले अरावली में पौधारोपण दिखाना खुली पर्यावरणीय धोखाधड़ी है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में अडानी समूह के लिए हो रहे जंगल कटान को संविधान, पेसा कानून और वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन बताया।

“अब हवा-पानी भी सरकार के निशाने पर” — आइसा

आइसा भोजपुर जिला सचिव विकाश कुमार ने कहा कि सरकार शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला कर रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अब हवा, पानी, जंगल और समुद्र भी कारपोरेट मुनाफे के लिए सरकार के निशाने पर हैं, जिसके खिलाफ़ व्यापक जनएकजुटता जरूरी है।

जनभागीदारी और अपील

सभा के अंत में देशभर के नागरिकों और संगठनों से अरावली, हिमालय, ग्रेट निकोबार और हसदेव अरण्य की रक्षा के लिए आवाज़ बुलंद करने की अपील की गई।

मार्च और सभा में भाकपा माले राज्य कमेटी सदस्य सुधीर सिंह, आरा मुफस्सिल सचिव विजय ओझा, आइसा राज्य सचिव कॉ. शबीर कुमार, RYA जिला अध्यक्ष निरंजन केसरी सहित बड़ी संख्या में भाकपा माले, आइसा और RYA के कार्यकर्ता शामिल हुए।

— जारीकर्ता:
रौशन कुशवाहा
जिला सहसचिव, आइसा भोजपुर

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