आरा, 25 फरवरी 2026। शहर के सरदार पटेल बस स्टैंड स्थित मंच पर बुधवार को भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान, आरा के तत्वावधान में होली मिलन सह महामूर्ख सम्मेलन–2026 का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन “भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच” पर किया गया, जहां दिनभर सांस्कृतिक, साहित्यिक और हास्य प्रस्तुतियों का सिलसिला चलता रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. डॉ. जया जैन ने की, जबकि मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र सिंह ने प्रभावी ढंग से किया। शुभारंभ सामूहिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद पटना से आई गायिका पूजा पाण्डेय ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
होली गीतों पर झूमे दर्शक
व्यास कमलेश पासवान के नेतृत्व में होली गीतों का दौर शुरू हुआ। पखावज पर भगवती पासवान, झाल पर पारस नाथ पासवान और नंदकिशोर राम, हारमोनियम पर रघु पासवान, मुरली पर दूधेश्वर मिश्र, झांझ पर कृष्ण प्रताप सिंह तथा ड्रम पर राम सुख राय ने संगत देकर कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
गायिका पूजा पाण्डेय ने “खेले मसाने में होली दिगम्बर”, “बाबा हरिहर नाथ सोनपुर में होली खिलत है” और “गोरिया करके श्रृंगार अंगना में पीसे ली हरदिया” जैसे पारंपरिक होली गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शकों की “एक और” की मांग के बीच संचालक ने वाराणसी से आई गायिका डिम्पल राय को मंच प्रदान किया। डिम्पल राय ने “पनिया के जन जा अकेला झरेला” गीत प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
इसी क्रम में वाराणसी से ही आई गायिका कनक लता सिंह ने देश के जवानों को समर्पित होली गीत “कागा ले जा अबीर…” प्रस्तुत कर भावनात्मक माहौल बना दिया। भीखारी ठाकुर के सहकर्मी रघु पासवान ने “कान्हा मत करs बरजोरी” गीत गाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया।
हास्य कवि सम्मेलन में गूंजा ठहाकों का दौर
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में हास्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कवि केशव ठाकुर ने कविता और जोगिरा प्रस्तुत किया। कवि दूधेश्वर मिश्र ने “मउगी हमार हमरा के डाटत बीया” सुनाकर दर्शकों को लोटपोट कर दिया। कुमार अजय सिंह ने दहेज प्रथा पर तीखा व्यंग्य करते हुए गंभीर कविता सुनाई। डॉ. कुमार शीलभद्र ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस और भोजपुरी भाषा को समर्पित कविता प्रस्तुत की। रंगकर्मी एवं नाटककार कृष्णेंदु ने हाइकु शैली में होली का चित्रण कर सराहना बटोरी।
महामूर्ख सम्मेलन बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के तीसरे सत्र में महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन किया गया, जो दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय रहा। विभिन्न प्रतिभागियों को रोचक उपाधियों से नवाजा गया।
मूर्ख भिखारी कूटनी बुआ के रूप में कनक लता सिंह, मूर्ख भिखारी पंडित के रूप में डॉ. कुमार शीलभद्र, मूर्ख भिखारी कलाकार के रूप में रघु पासवान, मूर्ख भिखारी नेता के रूप में जय किशोर सिंह, मूर्ख भिखारी भौजाई के रूप में पूजा पाण्डेय, मूर्ख भिखारी लौंडा के रूप में केशव ठाकुर, मूर्ख भिखारी गायक के रूप में कमलेश पासवान, मूर्ख भिखारी साहित्यकार के रूप में कृष्णेंदु, मूर्ख भिखारी पत्रकार के रूप में रविन्द्र कुमार, मूर्ख भिखारी कवि के रूप में कुमार अजय सिंह, मूर्ख भिखारी नाउन के रूप में डिम्पल राय, मूर्ख भिखारी मंडलेश्वर के रूप में दूधेश्वर मिश्र, मूर्ख भिखारी रानी के रूप में प्रो. डॉ. जया जैन तथा मूर्ख भिखारी राजा के रूप में विनोद सिंह को सम्मानित किया गया।
सामाजिक सद्भाव का संदेश
कार्यक्रम में अमन राज, संतोष कुमार, रूपा कुमारी, दीपावली श्रीवास्तव, धर्मशिला देवी, प्रताप कुमार, नारायण सिंह, विशाल कुमार, सर्वजीत कुमार, सुरेश भोजपुरी, जय शंकर, डॉ. आर.सी. भूषण और राजू शुक्ला सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अंत में कृष्ण यादव “कृष्णेंदु” ने सभी कलाकारों, साहित्यकारों, पत्रकारों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में विभिन्न प्रकार से नफरत फैलाने की कोशिशें हो रही हैं, ऐसे में सभी को सचेत रहकर आपसी भाईचारे के साथ होली जैसे पावन पर्व को मिल-जुलकर मनाना चाहिए।
कार्यक्रम ने न केवल सांस्कृतिक समृद्धि का परिचय दिया, बल्कि सामाजिक एकता और सद्भाव का भी संदेश दिया।