जमुई में “माटी का बल दंगल” से गुंजा अखाड़ा, परंपरागत कुश्ती को बढ़ावा देने की पहल

जमुई, बिहार। भगवान महावीर की पावन धरा जमुई में पारंपरिक खेल कुश्ती को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। सम्राट चौधरी ने श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम के मैदान पर दो दिवसीय “माटी का बल दंगल” प्रतियोगिता का अग्नि ज्योति प्रज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस प्रतियोगिता का समापन 15 फरवरी को किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि “माटी का बल दंगल” जैसे आयोजन परंपरागत कुश्ती को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने कहा कि जमुई शहर में प्राचीन खेलों को पुनर्जीवित करने और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के उद्देश्य से इस दंगल का आयोजन किया गया है। उन्होंने युवाओं से कुश्ती सीखने की अपील करते हुए कहा कि यह खेल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।

उन्होंने कहा कि जहां दंगल होता है, वहां सौहार्द और भाईचारे का वातावरण स्वतः निर्मित होता है। कुश्ती न केवल शक्ति और कौशल का खेल है, बल्कि यह सामाजिक समरसता को भी मजबूती प्रदान करता है। उपमुख्यमंत्री ने सभी पहलवानों को खेल भावना के साथ मुकाबला करने का संदेश दिया।

इस अवसर पर बिहार सरकार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दो दिनों तक चलने वाले इस बाहुयुद्ध में सैकड़ों ख्याति प्राप्त पहलवान अपने दांव-पेंच का प्रदर्शन करेंगे, जिससे दर्शकों को पारंपरिक कुश्ती देखने का अवसर मिलेगा।

विधायक दामोदर रावत ने कहा कि जमुई में “माटी का बल दंगल” का आयोजन जिले के लिए गौरव की बात है। इससे जमुई कुश्ती के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएगा।

कार्यक्रम में बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के संयुक्त सचिव रविन्द्र शंकरण, जिलाधिकारी नवीन कुमार, पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल, बिहार कुश्ती संघ के अध्यक्ष विशाल सिंह, जदयू जिलाध्यक्ष शैलेंद्र महतो, भाजपा जिलाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद केशरी, लोजपा (रामविलास) जिलाध्यक्ष जीवन सिंह, रालोजपा जिलाध्यक्ष अरुण कुमार मंडल, जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष ई. शंभू शरण, निवर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष कन्हैया कुमार सिंह, भाजपा नेत्री साधना सिंह सहित कई गणमान्य अतिथि एवं एनडीए के समर्थक उपस्थित रहे।

“माटी का बल दंगल” के आयोजन से जमुई में पारंपरिक खेल संस्कृति को नई ऊर्जा मिली है, वहीं युवाओं में भी कुश्ती के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है।

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